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Wednesday, August 31

जुदाई की ईद!

ख्याब में मेरे वो रोज़ ही नज़र आता,
कल जाने क्या बात थी कि ईद हो गई!


तुम ना आये ,न  कोई खत आया,
चाँद क्यों निकला ईद क्यों आई!


चुनरी के सितारे क्यों चमके,
मेहदी मेरी क्यों ये रंग लाई!

7 comments:

shama ने कहा…

Wah! Bahut khoob!

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

कुछ हटके दिखते हैं रंग ईद के।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

दिल को छुते ख्याल

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर।
गणशोत्सव की शुभकामनाएँ।

kshama ने कहा…

तुम ना आये ,न कोई खत आया,
चाँद क्यों निकला ईद क्यों आई!
Nihayat sundar rachana!

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

चाँद क्यूँ निकला - अच्छा लिखा है भाई

shephali ने कहा…

kuch sawalo ke jawb naa hi mile to acha
sundar rachna