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Saturday, May 16, 2026

क्या करू ।

अपनी ख्वाहिशों के जख्मों का, 
क्या करूं इलाज, 
रूह मेरी हिला के रख दी है, इन तमन्नाओं ने, क्या करूं, 
चारागरो,हकीम बन के देख लिया, 
भिन्नभिन्नाती हैं,लालची मक्खियों की तरह, तमाम ख्वाहिशें,क्या करूं! 
तमाम रिवायतें,निभाके देख लिया, 
जाती ही,नहीं,ये ख़लिश क्या करूं, 
चलिये, अपने अपने खु़दा को याद करें,
 वो भी न माना तो, किसको याद करूं! 
भूल जायें चलो,सब हम मिल कर, 
सिर पे सेब गिरे तो, न्यूटन को भला,क्यों याद करूं, 
मेरी धरती है सपट,तेरी गोल होगी!
 मेरा निगेहबान मुझे दिखता नहीं, 
तेरे भगवान को मैं क्यों याद करूं!