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Thursday, August 8, 2013

चाँद! ईद का!

चाँद तो चाँद है,

ईद का हो!

दूज का  हो!

हो पूनम का!


या,

चेहरा सनम का!

चाँद तो चाँद है.

   _कुश शर्मा.

मगर ये भी याद रखना है ज़ुरूरी,

"धूप लाख मेहरबाँ हो,मेरे दोस्त,
धूप, धूप होती है,चाँदनी नहीं होती"
     _शायर (न मालूम)
 

Saturday, July 27, 2013

दुआ का सच!

ज़ख्म देता है कोई,मुझे कोई दवा देता है,
कौन ऐसा है,यहाँ जो मुझको वफ़ा देता है!


ये बारिशें भी कब यहाँ साल भर ठहरतीं है,
हर नया मौसम मिरे ज़ख्मों को हवा देता है।



तेरी बातें न करूँ मैं, अगर दीवारों से,
है कोई काम?जो दीवानों को मज़ा देता है!


दुश्मनों से ही है अब एक रहम की उम्मीद,
है कोई दोस्त, जो, मरने की दुआ देता है?