ये सब हैं चाहने वाले!और आप?

Sunday, February 2, 2014

ज़िन्दगी!

दर्द की चट्टान से रिसती,
पानी की धार
ज़िन्दगी,

जून की दोपहर में,
चढता बुखार
ज़िन्दगी,

जागी आँखों में,
नींद का खुमार
ज़िन्दगी,

खुशी और ग़म की,
लटकती  तलवार,
ज़िन्दगी,

भरी आँखों के,
सावन में मल्हार,
ज़िन्दगी,

एक नये साज़ के,
टूटे से तार,
ज़िन्दगी,

सूखी फ़सल के बाद,
लाला का उधार,
ज़िन्दगी,

भूखे पेट,चोटिल जिस्म को,
माँ का दुलार ,
ज़िन्दगी,

बनावट के दौर में,
होना आँखों का चार,
ज़िन्दगी,

एक ख़फ़ा दोस्त की,
अचानक पुकार,
ज़िन्दगी,

Monday, January 6, 2014

अथ: नर उवाच:!

जीवन सरक जाता है,
एक दम चुपचाप,
बिना बताये,
उन सब,
पदार्थों, और परिस्थितियों की ओर,
जो किन्चित हमें,
ढकेल देती हैं,
नितान्त
एकाकीपन और मृगमारिचिका की ओर,
जहाँ, है, बस वियोग और पछतावा,
सीता,शकुन्तला,अहिल्या.....
और भी न जाने किस किस की तरह!