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Saturday, July 15, 2017

चन्द मुख्तसर शेर

चन्द मुख्तसर शेर अपने सुधि पाठकों के लिये।
न मैं तेरे ख्याल जैसा हूँ,
न मैं मेरे सवाल जैसा हूँ,
न मैं तेरे चश्मे तर में हूँ,
न मैं किसी उदास नज़र में हूँ।
मैं हूँ ही नहीं,मुझे तलाश मत,
गर हूँ कहीं तो असर में हूँ!

असर = गुण/ तासीर
असर= बहुत ही आनन्दित

चटक जाता है बिखर जाता है, शीशे का है ये दिल,
क्या फर्क इस बिचारे को कौन था कातिल।

इस कदर वख्त ने घिसा है हमें ,
चमक तो आई,वज़न जाता रहा।

                 


Friday, April 28, 2017

बात बात में वो बात भूल गया
जो बात बताने के लिये
बात शुरू की थी,
क्या पता था,
बातों बातों मे वो बात भी आ जायेगी,
जिसे बताने से,
बात बिगड आयेगी ,
मगर,
गम इस बात का है,
कि वो बात जो बतानी थी,
मगर भूल गया,
वही बात
उन्हें बुरी लगी शायद!
क्यों कि,
"बातों बातों में कोई बात बुरी लगी हो शायद,
मेरा महबूब बिना बात के खफ़ा नहीं होता."