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Thursday, November 4

गंगा!! कौन?



हरि पुत्री बन कर तू उतरी
माँ गंगा कहलाई,
पाप नाशनी,जीवन दायनी
जै हो गंगा माई!

भागीरथी,अलकनंदा,हैं 
नाम तुम्हारे प्यारे,
हरिद्वार में तेरे तट पर
खुलते हरि के द्वारे!

निर्मल जल 
अमृत सा तेरा,
देह प्राण को पाले
तेरी जलधारा छूते ही
टूटें सर्वपाप के ताले!

माँ गंगा तू इतनी निर्मल
जैसे प्रभु का दर्शन,
पोषक जल तेरा नित सींचे 
भारत माँ का आंगन!

तू ही जीवन देती अनाज में 
खेतों को जल देकर,
तू ही आत्मा को उबारती
देह जला कर तट पर!

पर मानव अब 
नहीं जानता,खुद से ही क्यों हारा,
तेरे अमृत जैसे जल को भी
कर बैठा विषधारा!

माँ का बूढा हो जाना,
हर बालक को खलता है,
प्रिय नहीं है,सत्य मगर है,
जीवन यूंही चलता है!

हमने तेरे आँचल में
क्या क्या नहीं गिराया,
"गंगा,बहती हो क्यूं?"भी पूछा,
खुद का दोष न पाया!

डर जाता हूं सिर्फ़ सोच कर,
क्या वो दिन भी आयेगा,
गंगाजल मानव बस जब,
माँ की आँखो में ही पायेगा! 

10 comments:

Shekhar Suman ने कहा…

bahut hi sundar rachna...
आपको और आपके परिवार को दिवाली की शुभकामनाएं..
मेरे ब्लॉग पर इस बार संगीता जी की रचना..
सुनहरी यादें :-३ ...

सुरेन्द्र बहादुर सिंह " झंझट गोंडवी " ने कहा…

ganga ma par pavitra rachna
shubh deepawali

Coral ने कहा…

बहुत सुन्दर ...

दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये

amar jeet ने कहा…

गंगा की ही तरह पवित्र आपके विचार है !
दीपावली की आपको बहुत बहुत शुभकामनाये .............

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

सराहनीय लेखन........
+++++++++++++++++++
चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
मंगलमय हो आपके, हेतु ज्योति का पर्व॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

सराहनीय लेखन........
+++++++++++++++++++
चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
मंगलमय हो आपके, हेतु ज्योति का पर्व॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर.....
दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये

Preeti Singh ने कहा…

GANGA!!KAUN? "bahut sundar likha hai apne" meine apki yeh pehli rachna padhi hai..meri taraf se aur sabne jisne is rachna ko pada hai.."itni uttam rachna ke liye".. apko bahut bahut badhai.

ktheLeo ने कहा…

@प्रीति जी,

आपने मेरी रचना पहली बार पढी और आपको पसंद आई ,लिखना सकारथ हुया!दरसल शब्द कविता बनते ही तब है, जब श्रोता/पाठक,अपनी भावनायें उनमें प्रतिबिम्बित पाते हैं!
आपका दिल से धन्यवाद "सच में" पर आने और विचार व्यक्त करने के लिये।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

माँ गंगा तू इतनी निर्मल
जैसे प्रभु का दर्शन,
पोषक जल तेरा नित सींचे
भारत माँ का आंगन ...

माँ गंगा को हमारा भी नमन ,.....