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Thursday, April 28

समुन्दर के किनारे!



कल शाम मैं समुन्दर के साथ था,
बडी ही अजीब बात है,
न तो मैं वहाँ उसके बुलावे पे गया था,
और न ही मुझे उम्मीद थी कि,
मैं कभी मिल पाऊगाँ,
"समुन्दर"जैसी बडी शैह से!



पर हर लम्हा जो मैं गुजार आया,
’समुन्दर’ के साथ,
अपने आप में ’एक मुकम्मल ज़िन्दगी’है!

आप को गर यकीं न आये,
तो अभी बंद करिये अपनी आँखें,
और मुकम्मल तन्हाई में,
कोशिश कीजिये,
समुन्दर को 

सुनने की,
सूघंने की ,
अपनी ज़िल्द पर उसकी,
ठंडी मगर खारी हवा,
को महसूस करने की,

यकीं मानिये,
समुन्दर से गहरा और शांत कुछ भी नही!
और हम सब,


फ़िरते है यहाँ से वहाँ
लिये  अपना अपना,
एक एक समुन्दर 
प्यासे और अशांत!  


और बेखबर भी कि,
हम सब एक समुन्दर है!




8 comments:

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !
फ़िरते है यहाँ से वहाँ
लिये अपना अपना,
एक एक समुन्दर
प्यासे और अशांत!
बिलकुल सत्य है यह ! हर मन में एक समंदर है और उसीकी तरह कभी वहाँ सुनामी सी स्थिति पैदा हो जाती है तो कभी अपार शान्ति और ठहराव भी मिल जाता है ! बहुत सुन्दर !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

समंदर को आँख बन्द कर महसूस करना खुदा के संग खुद की भी इबादत है ... और खुद से मिलना वाकई आसान नहीं होता
फ़िरते है यहाँ से वहाँ
लिये अपना अपना,
एक एक समुन्दर
प्यासे और अशांत!
और बेखबर भी कि,
हम सब एक समुन्दर है!

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

’सच में’ हम समन्दर हैं लेकिन बेखबर समन्दर।
बहुत अच्छी रचना है, आभार।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

यकीं मानिये,
समुन्दर से गहरा और शांत कुछ भी नही!

बहुत खूब ! हर दिल में एक समंदर है ...

Archana ने कहा…

हम सब एक समुन्दर है----समुन्दर से भी बड़े....गहरे...

shikha varshney ने कहा…

सम सब समंदर हैं अपने अंदर बहुत कुछ समाये फिरते हैं.

Dinesh pareek ने कहा…

आप की बहुत अच्छी प्रस्तुति. के लिए आपका बहुत बहुत आभार आपको ......... अनेकानेक शुभकामनायें.
मेरे ब्लॉग पर आने एवं अपना बहुमूल्य कमेन्ट देने के लिए धन्यवाद , ऐसे ही आशीर्वाद देते रहें
दिनेश पारीक
http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/
http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!