ये सब हैं चाहने वाले!और आप?

Saturday, May 7

मै और मेरी तिश्‍नगी!




मेरी तिश्‍नगी ने मुझको ऐसा सिला दिया है,
बरसात की बूँदों ने ,मेरा घर जला दिया है।

मैने जब भी कभी चाहा, मेरी नींद संवर जाये,
ख्याबों ने मेरे आके ,मुझको जगा दिया है।

मेरी किस खता के बदले,मुझे ऐसी खुशी मिली है,
मेरी आँख फ़िर से नम है,मेरा दिल भरा भरा है।

मै अकेला यूँ ही अक्सर, तन्हाइयों में खुश था,
तूने  मेरे पास आ के, मुझको फ़ना किया है।

जो खुशी मुझे मिली है, इसे मैं कहाँ सजाऊँ,
कहीं जल न जाये दामन, मेरा दिल डरा डरा है।



10 comments:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

मै अकेला यूँ ही अक्सर, तन्हाइयों में खुश था,
तूने मेरे पास आ के, मुझको फ़ना किया है।

waah... bahut badhiyaa

Rajeev Bharol ने कहा…

मेरी तिश्‍नगी ने मुझको ऐसा सिला दिया है,
बरसात की बूँदों ने ,मेरा घर जला दिया है।

मैने जब भी कभी चाहा, मेरी नींद संवर जाये,
ख्याबों ने मेरे आके ,मुझको जगा दिया है।

बहुत बढ़िया....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

मैने जब भी कभी चाहा, मेरी नींद संवर जाये,
ख्याबों ने मेरे आके ,मुझको जगा दिया है।

वाह, क्या शेर कहा है ... शुभानल्लाह !

ktheLeo ने कहा…

e-mail से शमा जी (Shama K ) ने कहा:

गज़ब की रचना है! ब्लॉग पे कई बार कोशिश की मगर कमेन्ट पोस्ट नही हुआ!

Coral ने कहा…

जो खुशी मुझे मिली है, इसे मैं कहाँ सजाऊँ,
कहीं जल न जाये दामन, मेरा दिल डरा डरा है।


बहुत खूब

http://rimjhim2010.blogspot.com/2011/05/happy-mothers-day.html

ktheLeo ने कहा…

kshama sadhana Ji ने e-mail से कहा:


बेहतरीन शब्दों से सजी रचना!
ब्लॉग खुलते ही बंद हो जा रहा है...ब्लॉग पे कमेन्ट नही दे पा रही हूँ! माफी चाहती हूँ!

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

sundar gazal.. aur shbad chayan bhi anukool... achha laga aapke blog me aakar.. Sadar

Patali-The-Village ने कहा…

वाह, क्या शेर कहा है|धन्यवाद|

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

जो खुशी मुझे मिली है, इसे मैं कहाँ सजाऊँ,
कहीं जल न जाये दामन, मेरा दिल डरा डरा है।

बहुत ख़ूब!

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

मर्ज ही ऐसा है साहब, जो दर्द है वही दवा है, इसीलिये ये सब हो रहा है।

बहुत खूब लिखा है एक एक शेर।