ये सब हैं चाहने वाले!और आप?

Saturday, October 8

झुनझुने!



कोई ऐसा शहर बनाओ यारों,
हर तरफ़ आईने लगाओ यारों!


नींद में खो गये हैं ज़मीर सभी,
शोर करो इन को जगाओ यारो!



नयी नस्लें इन्ही रास्तों से गुजरेंगी,
राहे मन्ज़िल से ये काई हटाओ यारो!


बच्चे भूखे हैं, दूध मांगते है,
ख्वाब के झुनझुने मत बजाओ यारों!



9 comments:

POOJA... ने कहा…

bahut khoob...
wakai aajkal jhunjhune hi to bajte hain har taraf...

anju(anu) choudhary ने कहा…

bahut khub....shabd shabd bolta huya sa....aabhar

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बच्चे भूखे हैं, दूध मांगते है,
ख्याब के झुनझुने मत बजाओ यारों!
..............
दिल के दरवाज़े खोलो अपने
दूध का ग्लास उनके लिए ले आओ यारों

मनोज कुमार ने कहा…

सुंदर!

***Punam*** ने कहा…

"नींद में खो गये हैं ज़मीर सभी,
शोर करो इन को जगाओ यारो"

काश कि ऐसा हो पाता.....!!

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

ख्वाब भूख बढ़ाते हैं, भूख तो रोटी के झुनझुने से ही बुझेगी।
बहुत खूब।

Vinay Prajapati 'Nazar' ने कहा…

sachmuch bahut khoob

shama ने कहा…

Kya baat hai! Harek pankti dohrayee ja saktee hai!

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

सुंदर विचार !!