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Monday, January 23

उसका सच! एक बार फ़िर!


मुझे लग रहा है,पिछले कई दिनों से ,
या शायद, कई सालों से,

कोई है, जो मेरे बारे में सोचता रहता है,

हर दम,

अगर ऐसा न होता ,
तो कौन है जो, मेरे गिलास को शाम होते ही,
शराब से भर देता है।

भगवान?

मगर, वो ना तो पीता है,
और ना पीने वालों को पसंद करता है ,
ऐसा लोग कह्ते हैं,

पर कोई तो है वो !


कौन है वो, जो,
प्रथम आलिगंन से होने वाली अनुभुति 
से मुझे अवगत करा गया था।

मेरे पिता ने तो कभी इस बारे में मुझसे बात ही नहीं की,

पर कोई तो है, वो!

कौन है वो ,जो 
मेरी रोटी के निवाले में,
ऐसा रस भर देता है,
कि दुनियां की कोई भी नियामत,
मुझे वो स्वाद नहीं दे सकती।
पर मैं तो रोटी बनाना जानता ही नही

कोई तो है ,वो!

कौन है वो ,जो,
उन तमाम फ़ूलों के रगं और गंध को ,
बदल देता है,
कोमल ,अहसासों और भावनाओं में।

मेरे माली को तो साहित्य क्या, ठीक से हिन्दी भी नहीं आती।

कोई तो है ,वो,

वो जो भी है,
मैं जानता हूं, कि,
एक दिन मैं ,
जा कर मिलु्गां उससे,
और वो ,हैरान हो कर पूछेगा,


क्या हम, पहले भी ,कभी मिलें हैं?




20 comments:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कौन है वो ,जो
मेरी रोटी के निवाले में,
ऐसा रस भर देता है,
कि दुनियां की कोई भी नियामत,
मुझे वो स्वाद नहीं दे सकती।
पर मैं तो रोटी बनाना जानता ही नही

कोई तो है ,वो!... गजब की रचना लिखी है , एक एक शब्द - कोई तो है जो इन एहसासों को जानता है , पर ...

अनुपमा पाठक ने कहा…

भगवान?

मगर, वो ना तो पीता है,
और ना पीने वालों को पसंद करता है ,
ऐसा लोग कह्ते हैं,

जीवन अपने आप में एक नशा है... इसे बनाने वाला इस सुन्दर सम्भावना से इनकार कैसे करेगा!
बेहद सुन्दर रचना!!!
सादर!

अनुपमा पाठक ने कहा…

वो जो भी है,
मैं जानता हूं, कि,
एक दिन मैं ,
जा कर मिलु्गां उससे,

ये विश्वास बलवती रहे... वह स्वयं चल कर आएगा मिलने!
कहते हैं, वो ऐसे चमत्कार भी करता है!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ... कल्पनाओं में बिम्ब बनाना ... उससे बातें करना ... जानना और न जानना ... फिर अनजाने ही मिलने की कामना ... बहुत दिलचस्प और लाजवाब रचना ....

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

कौन है वो ,जो
मेरी रोटी के निवाले में,
ऐसा रस भर देता है,
कि दुनियां की कोई भी नियामत,
मुझे वो स्वाद नहीं दे सकती।

KYA BAAT HAI !
BAHUT SUNDAR !!

amrendra "amar" ने कहा…

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

Atul Shrivastava ने कहा…

गजब के अहसास।
बेहतरीन भाव।
सुंदर रचना।

anju(anu) choudhary ने कहा…

हां कोई तो हैं जो ....इन एहसासों को साथ साथ ..जी रहा हैं

ktheLeo ने कहा…

आप सब पाठकों का तहे दिल से शुक्रिया रचना को अपने आशीष से नवाज़ने के लिये!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

हम सभी उसकी तलाश में हैं...लगता है के बस अभी मिल जायेगा यहीं और तभी वो गायब हो जाता है...ये तलाश हम सब की तलाश है...शायद वो यहीं कहीं है....या फिर हम में ही छुपा कहीं...बहुत अच्छी लगी आपकी रचना...बधाई स्वीकारें

नीरज

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

सच कहा, कोई तो है जो जीवन में हर वो भाव पैदा करता है जो जीने के लिए लाजिमी है. पर कौन...नहीं पता... पर कोई है...

कौन है वो ,जो,
उन तमाम फ़ूलों के रगं और गंध को ,
बदल देता है,
कोमल ,अहसासों और भावनाओं में।

kshama ने कहा…

कौन है वो ,जो,
उन तमाम फ़ूलों के रगं और गंध को ,
बदल देता है,
कोमल ,अहसासों और भावनाओं में।
Sach....wo kaun chitrkaar hai? Ye kis kavikee kalpnaka chamatkaar hai! Ye waalee rachana yaad dila dee aapne!Bahut khoob!

Suman ने कहा…

nice

kase kahun?by kavita verma ने कहा…

कोई तो है ,वो,

वो जो भी है,
मैं जानता हूं, कि,
एक दिन मैं ,
जा कर मिलु्गां उससे,
और वो ,हैरान हो कर पूछेगा,


क्या हम, पहले भी ,कभी मिलें हैं?
bahut khoobsurat...us ko shayad ham sabhi dhundh rahe hai...

संजय भास्कर ने कहा…

क्या कहूँ? आपने तो निशब्द कर दिया.

दीपक बाबा ने कहा…

कौन

ktheLeo ने कहा…

@ दीपक बाबा.
मैं और मेरा "वो"!

Mahesh Barmate ने कहा…

बेहतरीन... :)

बस एक शब्द...
आपकी रचना ने मुझे निःशब्द कर दिया :)

sakhi with feelings ने कहा…

बहुत अच्छी तरह हर अहसास भर कर कलम में कलम जब चलायी अपने ..सुंदर कविता बन गयी

vidya ने कहा…

बहुत सुन्दर....

आपकी रचनाये बहुत भायी दिल को...
अब पढ़ती रहूंगी..
सो आज से फोलो करती हूँ...
शुभकामनाएँ..